यूपी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच दल-बदल का सिलसिला तेज हो गया है। इसी क्रम में कानपुर के वरिष्ठ ओबीसी नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री रह चुके प्रो. राम आसरे कुशवाहा ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
बताया जाता है कि वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से बर्खास्त कर दिया था। तत्कालीन सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव के कहने पर यह कार्रवाई की थी। मुलायम के निर्देश पर पद छीना गया था। इसके बाद उन्हें सुदूर संवेदन उपयोग केंद्र, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था। यह पद कैबिनेट मंत्री के दर्जे के बराबर माना जाता था। पार्टी ने उस समय उनके कुछ बयानों को कार्रवाई का आधार बनाया था।
प्रदेश की राजनीति के चर्चित ओबीसी नेता प्रो. राम आसरे कुशवाहा का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। कानपुर के सरसौल क्षेत्र से 1996 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज कर राजनीति में पहचान बनाने वाले कुशवाहा प्रदेश के प्रमुख कुशवाहा नेताओं में गिने जाते हैं। वे छह बार मंत्री रह चुके हैं और पिछड़ा वर्ग की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
समाजवादी पार्टी में रहते हुए उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था और कुशवाहा समाज को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। हालांकि वर्ष 2013 में विवादित बयानों के बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
गुरुवार को भाजपा छोड़कर दोबारा सपा में शामिल हुए कुशवाहा ने मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी को मज बूत करने का संकल्प जताया। उनके सपा में लौटने को प्रदेश में ओबीसी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

