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पीएम मोदी के 5 बड़े फैसले, केंद्रीय कर्मचारियों की बदली तकदीर

प्रधानमंत्री के 12 साल के कार्यकाल में वेतन आयोग से लेकर पेंशन तक कई अहम बदलाव हुए।

झटपट समझें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें 8वें वेतन आयोग का गठन, यूनिफाइड पेंशन स्कीम, HRA में बदलाव, NPS में सरकार का योगदान बढ़ाना और CGHS में सुधार शामिल हैं। इन फैसलों से कर्मचारियों के वेतन और भविष्य की योजनाओं में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

मुख्य बातें

  • 8वें वेतन आयोग का गठन पिछले साल किया गया, जिसकी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक मिलेंगी।
  • यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी, जिसमें न्यूनतम 25 साल की सेवा पर औसत मूल वेतन का 50% पेंशन मिलेगी।
  • HRA की दरें DA बढ़ने के साथ बढ़ीं, जो अब 30%, 20% और 10% हैं जब DA 50% पर पहुंच गया।
  • NPS कर्मचारियों के लिए सरकार का योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया है।
  • CGHS में मासिक योगदान और वार्ड की पात्रता को वेतन स्तर से जोड़ा गया, और आपातकालीन इलाज की सुविधा भी सुव्यवस्थित की गई।
एक व्यक्ति चश्मा पहने हुए, दाढ़ी और मूंछ के साथ, नीले रंग की जैकेट पहने हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग का गठन एक महत्वपूर्ण कदम रहा है।

PM Narendra Modi birthday : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने 12 साल के कार्यकाल में बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका फायदा बड़े वर्ग को मिला है। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों के हित में भी कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों की वजह से ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव आया बल्कि फ्यूचर प्लानिंग को लेकर भी एक नया विकल्प मिला। आइए पीएम मोदी के 5 बड़े फैसले के बारे में जान लेते हैं

वेतन आयोग का गठन पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन किया। यह वेतन आयोग अपनी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार सिफारिशों को लागू करेगी। बता दें कि सातवें वेतन आयोग को लागू भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही किया गया था। हालांकि, इसका गठन यूपीए (UPA) सरकार द्वारा 28 फरवरी 2014 को किया गया था। तब डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे।

UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प दिया। साल 2024 में मंजूर UPS को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया। यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत ही एक विकल्प के रूप में लाया गया है। इस स्कीम के तहत 25 साल की न्यूनतम अर्हक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। वहीं, कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने पर न्यूनतम पेंशन ₹10,000 प्रति माह तय की गई है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को उसकी पेंशन का 60 फीसदी पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके अलावा सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और न्यूनतम पेंशन पर महंगाई राहत (DR) भी दी जाएगी। रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के अलावा शर्तों के साथ एक एकमुश्त भुगतान भी मिलेगा।

HRA में बदलाव मोदी सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस(HRA) की दरों में भी बदलाव किया गया। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया और HRA की शुरुआती दरें क्रमशः 24%, 16% और 8% तय की गईं। बाद में महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ HRA की दरों में भी बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया। जब DA 25% हुआ, तो HRA की दरें बढ़कर 27%, 18% और 9% हो गईं। इसके बाद DA 50% पहुंचने पर HRA बढ़कर 30%, 20% और 10% हो गया। बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 पर्सेंट

NPS कर्मचारियों के लिए बढ़ाया योगदान केंद्र सरकार के NPS कर्मचारियों के लिए सरकार का योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया गया। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को साल 2004 में ही बंद कर दिया गया था।

CGHS में बदलाव पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS में कई अहम बदलाव हुए हैं। 7वें वेतन आयोग के बाद CGHS के मासिक योगदान और अस्पताल में वार्ड की पात्रता को वेतन स्तर से जोड़ा गया। इमरजेंसी की स्थिति में CGHS से जुड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा को भी व्यवस्थित किया गया है।

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